बुधवार, १४ ऑक्टोबर, २०१५

मुझको ईस रात की तन्हाईमें आवाज न दो - क्रांती साडेकर


मुझको इस रात की तन्हाई में आवाज़ ना दो
जिसकी आवाज़ रुला दे मुझे वो साज़ ना दो

मैंने अब तुमसे ना मिलने की कसम खाई है
क्या खबर तुमको मेरी जान पे बन आई है
मैं बहक जाऊँ कसम खा के तुम ऐसा ना करो

दिल मेरा डूब गया आस मेरी टूट गयी
मेरे हाथों ही से पतवार मेरी छूट गयी

अब मैं तूफ़ान में हूँ साहिल से इशारा ना करो

गायीका - लता मंगेशकर
संगीतकार : कल्याणजी आनंदजी
चित्रपट : दिल भी तेरा, हम भी तेरे (१९६०)

Our Karaoke Club साठी क्रांती साडेकर यांनी गायलेले सुंदर गीत.

हे गाणे मुकेश यांच्या आवाजात देखील आहे. त्याचे शब्द माहितीसाठी खाली देत आहे -

मुझको इस रात की तनहाई में आवाज़ ना दो
जिसकी आवाज़ रुला दे मुझे वो साज़ ना दो

रोशनी हो ना सकी दिल भी जलाया मैने
तुम को भूला ही नही लाख भुलाया मैने
मैं परेशां हूँ मुझे और परेशां ना करो

इस कदर जल्द किया मुझ से कनारा तुम ने
कोई भटकेगा अकेला ये ना सोचा तुम ने
छुप गये हो तो मुझे याद भी आया ना करो

गायक - मुकेश


शुक्रवार, ९ ऑक्टोबर, २०१५

जाने क्या सोच कर नहीं गुजरा - कैलास बनसोडे

कैलास बनसोडे


जाने क्या सोचकर नहीं गुजरा
एक पल रातभर नहीं गुजरा

अपनी तनहाई का औरों से ना शिकवा करना
तुम अकेले ही नहीं हो सभी अकेले हैं
ये अकेला सफ़र नहीं गुजरा

दो घड़ी जीने की मोहलत तो मिली है सब को
तुम भी मिल जाओ घडीभर तो ये ग़म होता है
एक घड़ी का सफ़र नहीं गुजरा

गीतकार : गुलज़ार
गायक : किशोर कुमार
संगीतकार : राहुलदेव बर्मन

चित्रपट : किनारा (१९७६)


जाने क्या सोच कर नहीं गुजरा - कैलास बनसोडे

संगीतकार : राहुलदेव बर्मन
किनारा चित्रपटातल्या या गाण्याची मोहिनी काही औरच आहे. एकाच वेळी ग्रुपमधील चार कलाकारांनी वेगवेगळ्या पद्धतीने हे गाणे सादर करून बहार आणली होती. ती सगळी गाणी हळूहळू येतीलच तुमच्या समोर. तुर्तास जे सर्वप्रथम आले ते पेश करत आहोत.
गीतकार : गुलज़ार





जाने क्या सोच कर नहीं गुजरा

गुरुवार, ८ ऑक्टोबर, २०१५

यम्मा यम्मा ये खुबसूरत समां - अनिल पाटिल


यम्मा यम्मा, यम्मा यम्मा, यह खूबसूरत समा,) ---2
(बस आज की रात है ज़िंदगी
कल हम कहाँ तुम कहाँ) ---2
  
(कब क्या होज़ाये किसको खबर
नाचले झूमकर)...
(यह ज़िंदगी एक लंबा सफ़र
पल भर के सब हम सफ़र).........
(एक रात के मेहमान सब यहाँ
कल हम कहाँ तुम कहाँ).........

(हंसते हुवे ऐसी शान से, दीवाने जल जाएँगे)....
(अरे जलती शमा से मिलके गले, परवाने जल
जाएँगे)....
(रह जायगा यादो का दिया, कल हम कहाँ तुम कहाँ)...

(यम्मा यम्मा, यम्मा यम्मा, यह खूबसूरत समा,).....
आनंद बक्षी
(बस आज की रात है ज़िंदगी , कल हम कहाँ तुम कहाँ)........
(बस आज की रात है ज़िंदगी , कल हम कहाँ तुम कहाँ

गीतकार   :  आनंद बक्षी
संगीतकार:  राहूल देव (आर.डी.) बर्मन
गायक      :  आर.डी. बर्मन/मोहम्मद रफी
चित्रपट    :   शान

शान चित्रपटातील हे जबरदस्त व्दंव्द्गीत सादर केले आहे अनिल पाटिल यांनी.

त्यांच्या गाण्याचे वैशिष्ट्य म्हणजे मुळ गाणे हे आर.डी. बर्मन आणि मोहम्मद रफी यांनी गायलेले असले तरी ईथे अनिल पाटिल यांनी ते एकट्यानेच दुहेरी आवाजात गायले आहे. आणि आर.डी. यांच्या स्वरातला रासवटपणा व रफीच्या स्वरातली कोवळीक यांचा सुरेख मिलाफ सांभाळला आहे. ईतका की हे गाणे एकाच गायकाने गायले आहे हे चटकन खरे वाटू नये ! ऐका हा स्वराविष्कार आणि आपला अभिप्राय नक्की कळवा !


मंझीले अपनी जगह हैं - मनोहर पांचाळ


मनोहर पांचाळ
मंजिलों पे के लूटते हैं दिलों के कारवाँ
कश्तियां साहिल पे अक्सर डूबती हैं प्यार की

मंजिलें अपनी जगह हैं, रास्ते अपनी जगह
जब कदम ही साथ ना दे, तो मुसाफिर क्या करे
यूं तो हैं हमदर्द भी और हमसफ़र भी हैं मेरा
बढ़ के कोई हाथ ना दे, दिल भला फिर क्या करे

डूबनेवाले को तिनके का सहारा ही बहोत
दिल बहल जाए फकत इतना इशारा ही बहोत
इतने पर भी आसमांवाला गिरा दे बिजलियाँ
कोई बतला दे ज़रा ये, डूबता फिर क्या करे

प्यार करना जुर्म है तो जुर्म हम से हो गया
काबिल--माफी हुआ, करते नहीं ऐसे गुनाह
संगदिल है ये जहां और संगदिल मेरा सनम
क्या करे जोश--जूनून और हौसला फिर क्या करे

बप्पी लाहिरी
गीतकार : अंजान
गायक : किशोर कुमार
संगीतकार : बप्पी लाहिरी

चित्रपट : शराबी (१९८४)





शराबी चित्रपटातील हे गीत गायलंय मनोहर पांचाळ यांनी

सागर किनारे - जय शिवचरण

जय शिवचरण

सागर किनारे, दिल ये पुकारे
तू जो नहीं तो मेरा कोई नहीं है

जागे नज़ारे, जागी हवायें
जब प्यार जागाजागी फिजायें
पल भर तो दिल की दुनियाँ सोयी नहीं है

लहरों पे नाचेकिरनों की परियां
मैं खोयी जैसेसागर में नदियां
तू ही अकेली तो खोयी नहीं है


गायक : लता - किशोर
संगीतकार : राहुलदेव बर्मन

चित्रपट : सागर (१९८५)



गीतकार : जावेद अख्तर




सागर किनारे - Our Karaoke Club साठी जय शिवचरण यांनी गायलेले हे सुंदर गीत. "अनप्लग्ड" गाण्यांच्या जमान्यात हे जुने गाणे एका वेगळ्याच पद्धतीने सादर केले आहे. ऐका आणि त्याची मजा अनुभवा. कसं वाटलं ते मात्र नक्की कळवा !

बुधवार, ७ ऑक्टोबर, २०१५

जाने कहाँ गये वो दिन - राजेश आयरे


जाने कहाँ गये वो दिन,
कहते थे तेरी राह में 
नज़रों को हम बिछायेंगे

चाहे कही भी तुम रहो,
चाहेंगे तुम को उम्रभर
तुम को ना भूल पायेंगे
जाने कहाँ...
Mukesh & SJ

मेरे कदम जहाँ पड़े
सजदे किये थे यार ने
मुझ को रुला रुला दिया
जाती हुई बहार ने
गीतकार : हसरत जयपुरी
जाने कहाँ...

अपनी नज़र में आज कल
दिन भी अंधेरी रात है
साया ही अपने साथ था,
साया ही अपने साथ है
जाने कहाँ...

चित्रपटाच्या वाढलेल्या लांबीमुळे वगळलेले कडवे, जे मुकेशनी लंडनच्या रॉयल अल्बर्ट हॉल येथील कार्यक्रमात खास लोकाग्रहास्तव सादर केले होते -

ईस दिल के आशियां में अब
उनके खयाल रह गयें
तोडके दिल वो चल दिये
हम तुम अकेले रह गये
जाने कहाँ...

गायक : मुकेश
संगीतकार : शंकर जयकिशन
चित्रपट : मेरा नाम जोकर (१९७०)

जाने कहाँ गये वो दिन - राजेश आयरे यांनी गायलेले सुंदर गीत !

मंगळवार, ६ ऑक्टोबर, २०१५

मुसाफिर हुं यारो - शेखर बापट


शेखर बापट

मुसाफिर हूँ यारों, ना घर है ना ठिकाना
मुझे चलते जाना है, बस चलते जाना

एक राह रुक गयी तो और जुड़ गयी
मैं मुड़ा तो साथ साथ राह मुड़ गयी
हवा के परों पर मेरा आशियाना
दिन ने हाथ थाम कर इधर बिठा लिया
रात ने इशारे से उधर बुला लिया
सुबह से, शाम से मेरा दोस्ताना

गीतकार : गुलज़ार
गायक : किशोर कुमार 
संगीतकार : राहुलदेव बर्मन 
परिचय (१९७२) चित्रपटातील हे गीत गायलंय शेखर बापट यांनी



पंचम आणि गुलजार